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सनातन धर्म की शाखाएँ और संप्रदाय: भारतीय संस्कृति का सार

सनातन धर्म भारतीय संस्कृति का मूलभूत अंग है और विभिन्न शाखाओं और संप्रदायों के माध्यम से विविधता को प्रकट करता है। यह संप्रदाय और शाखाएँ विश्वासों, आचार-व्यवहार, और धार्मिक अनुष्ठान के लिए विभाजित होती हैं। निम्नलिखित कुछ मुख्य सनातन धर्म की शाखाएँ और संप्रदाय हैं: वैष्णव संप्रदाय: यह संप्रदाय भगवान विष्णु और उसके अवतारों के प्रति श्रद्धा रखता है। इसमें श्रीवैष्णव, गौड़ीय, आदि सम्प्रदायें शामिल हैं। भगवान के भक्ति और सेवा को अपना मार्ग मानते हैं। शैव संप्रदाय: यह संप्रदाय भगवान शिव और उसके अभिव्यक्ति रूपों के प्रति श्रद्धा रखता है। इसमें पाशुपत, अष्टावक्र, और लिंगायत सम्प्रदाय शामिल हैं। शिव भक्ति और ध्यान उनके मार्ग माने जाते हैं। शक्त संप्रदाय: यह संप्रदाय देवी दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा रखता है। इसमें शक्त, शाक्त, और तन्त्र सम्प्रदाय शामिल हैं। मां दुर्गा की पूजा और भक्ति इस संप्रदाय के मूल अंग हैं। आर्य समाज: आर्य समाज भारत में बनाया गया एक समाज और संप्रदाय है, जिसका मुख्य उद्देश्य वैदिक विचारधारा को प्रसार करना है। इसमें सोसायटी आदर्श और सात्विक आचार-व्यवहार के प्रति जोड़ रखता है। अखंड भारतीय संप्रदाय: यह संप्रदाय वेद, उपनिषद, और धर्मशास्त्रों के मूल्य और सिद्धांतों के प्रचार-प्रसार के लिए जाना जाता है। इसमें वैदिक संस्कृति को संजोया जाता है और धार्मिक संवेदना को उत्साहित किया जाता है। ये कुछ प्रमुख सनातन धर्म की शाखाएँ और संप्रदाय हैं, जो भारतीय संस्कृति के सार को प्रदर्शित करते हैं और धार्मिकता और आध्यात्मिकता को उत्साहित करते हैं। ये संप्रदाय और शाखाएँ संस्कृति, सामाजिकता, और एकता को संबलती हैं और भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।